बुलंदशहर: समाज की किशोरियां ही मातृ शक्ति का रूप हैं। वर्तमान की किशोरियां ही भविष्य में मां बनती हैं। अगर समाज की किशोरियां स्वस्थ रहेंगी तभी वह मां बन सकेंगी और हमारा समाज संतुलित रहेगा। इसी के साथ मासिक धर्म पर घर में और बाहर बात करना बहुत जरूरी है। “चुप्पी तोड़ो” अभियान के तहत छात्राओं के साथ माहवारी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर कर सकते है। यह बात उत्तर प्रदेश में सर्वप्रथम बुलंदशहर जिले में डिजिटल माध्यम से आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में संचालन करते हुए एकता चौहान ने कही। उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “ठीक है मेरे दायरे तय करने वाले तुम सही पर मेरे पैरों की रफ्तार में तय करती हूं, गिरने पर भी उठ खड़े होने की दृढ़ता मैं तय करती हूं, अरे लड़कियों को ऐसा नही करना चाहिए कि गूंज को हवा में उड़ाने का रोमांच मैं तय करती हूं।” 

कार्य्रकम की अध्यक्षता एनएसएस यूपी एसएलओ अंशुमाली शर्मा ने की तथा संचालन खुर्जा की डिस्ट्रिक्ट ऑर्गेनाइसर एकता चौहान ने किया। आपको बता दें कि एनएसएस द्वारा पूरे उत्तर प्रदेश में सर्वप्रथम बुलंदशहर में इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन आयोजित करते हुए एनएसएस टीम द्वारा जागरूक करने की पहल की है। उक्त कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में एनएसएस क्षेत्रीय निदेशक अशोक श्रोती ने कहा कि यह एक प्राकृतिक बदलाव है जिसमें लड़कों में दाड़ी मूँछ का निकलना और लड़कियों में माहवारी शुरुआत होना है। इसमें लड़कियों को परिवार में आपसी संवाद करना चाहिए जिसमें संकोच नही करना चाहिए। अंशुमाली शर्मा ने कहा “प्रकृति प्रदत्त प्रक्रिया” यानी कि यह एक प्रकृति का वरदान है परंतु फिर भी इसे लड़कियों को एक अभिशाप की तरह जीना पड़ता है।माना जाता है कि द्रोपदी का जब कौरवों द्वारा चीरहरण हुआ था तब वह इसी रजस्वला की अवस्था में थी उस समय की परिस्थिति के अनुकूल ही शायद कौरवों को अभिशाप मिला जिससे उनकी हार हुई। माहवारी के दौरान छात्राओं को एल अलग नजरिये से देखा जाता है जो हमारे समाज के लिए अनुचित है लिहाजा हमें सभी को अपनी सोच में बदलाव लाने की भी जरूरत है ताकि कोई किसी को हीनभावना से न देखे। मुख्य अतिथि सीसीएस यूनिवर्सिटी के एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक वीरेंद्र कुमार रहे। मुख्य वक्ता शेहला जमाल ने कहा कि यह एक ऐसा चक्र है जो महिला को पूर्ण करता है। वक्ता नीलम विहरा ने कहा कि इस समय में स्त्री को अपने दिमाग से विभिन्न तरह की मिथ्याओं को हटाकर सम्पूर्ण आहार लेना चाहिए। यूनिसेफ वक्ता कुमार विक्रम ने बताया कि इस प्रकृति की देन में स्त्री अपनी मानसिक व शारीरिक परेशानी को खुलकर बताने में संकोच करती है तथा विभिन्न तरह की परेशानियों का सामना करती रहती है।

कार्य्रकम संयोजक प्रकाश चौधरी ने एक वीडियो के माध्यम से लड़कियों को होने वाली परेशानियों से दूर रहने के प्रति अवगत कराया। उन्होंने बताया कि महिला शरीर प्राकृतिक का गूढ़ है, महामारी एक ऐसी प्रक्रिया है जो स्त्री को पूर्ण बनाती है। कार्यक्रम मीडिया प्रभारी शिखा कौशिक ने उक्त कार्यशाला की जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्यशाला छात्राओं को माहवारी के प्रति भ्रांतियों से दूर करने के लिए आयोजित की गई है। इसके बाद किशोरियों से सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू हुआ। जहां न सिर्फ उपस्थित विशेषज्ञों ने किशोरियों से सवाल किए, बल्कि किशोरियों ने भी अपनी-अपनी समस्याओं को साझा करते हुए विशेषज्ञ से उनके जवाब भी मांगे। कार्यशाला में किशोरियों को सेनेटरी पैड के साथ आयरन की गोलियां खाने के बारे में भी जानकारी दी। आयरन की गोलियों को किस तरह लेना है ।

अंत में मासिक धर्म नहीं है शर्म” का नारा देते हुए सभी किशोरियों ने शपथ ली कि वह अब से इस विषय पर खुलकर बात करेंगी। उक्त कार्यशाला में एनएसएस जिला नोडल अधिकारी विवेकानंदा डे, एनएसएस पूर्व स्वीप कोर्डिनेटर डॉ पूनम पालीवाल, कार्यक्रम अधिकारी डॉ हरीश, अनिल कुमार, अंशु बंसल, विजय गर्ग, डॉ गीता रानी, भावना शर्मा, डॉ नम्रता, अवधेश कुमार, दीपा चौहान, गीता रानी, भूपेंद्र कुमार, अन्य कार्यक्रम अधिकारी उपस्थित रहे और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न प्रदेशों से छात्राएं उपस्थित रही।


छात्राएं इस पर भी ध्यान दें जाने कैसे कार्य करता है माहवारी चक्र- 


“माहवारी चक्र”

7×1= 7   (रक्तस्त्राव)

7×2=14  (गर्भाशय में अण्डे बनने शुरू)

7×3= 21 (लघुचक्र)

7×4= 28 (साधारण चक्र)

7×5= 35 (विस्तृतचक्र)

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