बुलंदशहर: आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस है, हेपेटाइटिस जिगर को प्रभावित करता है। आज हेपेटाइटिस का रोग महामारी जैसा ख़तरा बन कर सामने खड़ा है। हेपेटाइटिस बी का संक्रमण सबसे ज्यादा मां से बच्चे को होता है। हेपेटाइटीस का संक्रमण खून चढ़ाने,इस्तेमाल की गई सूई के प्रयोग,रेजर और दूसरे के टूथब्रश का इस्तेमाल करने, असुरक्षित यौन संबंध ,टैटू बनवाने, नाक-कान छिदवाने से होता है। हेपेटाइटिस से बचाव और इसका इलाज संभव है। बशर्ते कि लोग जागरुक रहें। विश्व हेपेटाइटिस दिवस से एक दिन पूर्व क्षेत्रीय नागरिकों को हेपेटाइटिस के प्रति जागरूक करने के लिए मुस्लिम गर्ल्स डिग्री कॉलेज की एनएसएस कार्य्रकम अधिकारी व उत्तर प्रदेश सरकार की “मुस्कुराएगा इंडिया पहल” के अंतर्गत जिला कॉउंसलर शिखा कौशिक ने ऑनलाइन एक कार्यशाला का आयोजन किया।

कॉउन्सलर शिखा कौशिक

जिसमें 250 से अधिक लोगों ने भाग लिया। कार्यशाला में शिखा ने बताया कि हेपेटाइटिस पांच प्रकार का होता है। हेपेटाइटिस- ए, बी, सी, डी और ई। विश्व की जनसंख्या के एक तिहाई लोग हेपेटाइटिस वायरस से संक्रमित है। हेपेटाइटिस वायरस का संचरण संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में जाने से होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वभर में 36 करोड़ से ज्यादा लोग हेपेटाइटिस के गंभीर वायरस से ग्रसित हैं। भारत में करीब चार करोड़ लोग इस वायरस के संक्रमण से ग्रसित हैं। ये सभी हेपेटाइटिस बी के वायरस से इंफेक्टेड हैं। इसमें हेपेटाइटिस ए तथा ई दूषित भोजन व जल से होता है। यह पीलिया का रूप है। हेपेटाइटिस बी व सी ज्यादा खतरनाक होता है। यह या तो संक्रमित रक्त चढ़ने या फिर असुरक्षित यौन संबंधों के कारण भी हो सकता है। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीका भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस सी के इलाज के लिए अभी तक कोई टीका नहीं बना है। इसका इलाज भी काफी महंगा है। इस भयानक बीमारी से समय रहते सही इलाज होने पर मरीज को बचाया जा सकता है। आम तौर पर हेपेटाइटिस का पता समय पर नहीं चलता। जब तक इसका असर दिखता है, काफी देर हो चुकी होती है। इसलिए जरूरी है कि मरीज स्वयं सावधान रहे।

“डॉ. पूर्णिमा के. नाईक”

दिल्ली के सीजेएचएस हॉस्पिटल की मातृत्व एवं प्रसूतिशास्री विभाग की वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. पूर्णिमा के. नाईक ने कहा कि विश्व मे 40 करोड़ से अधिक लोग हेपेटाइटिस बी अथवा सी से पीड़ित हैं। हर वर्ष लगभग 13 लाख लोग इस बीमारी की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। इस बीमारी का कोई लक्षण नहीं होता, केवल जांच कराने से ही इस बीमारी के बारे में जाना जा सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक रहते हुए अपनी हेपेटाइटिस की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए, जिससे समय रहते बचाव किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि कोई पीलिया, बुखार, लगातार थकावट या खुजली से पीड़ित है या किसी के परिवार में किसी अन्य सदस्य को हेपेटाइटिस बी अथवा सी की शिकायत है तो उसे तुरन्त अपनी जांच भी कर लेनी चाहिए। 10 में से 8 लोगों को पता ही नहीं चल पाता कि वे हेपेटाइटिस बी या सी से ग्रस्त हैं। लीवर सिरोसिस होने का मुख्य कारण हेपेटाइटिस बी और सी हैं, जिसके होने के बाद लीवर फेल तक जाता है और लीवर को प्रत्यारोपित तक करना पड़ सकता है।

विश्व हेपेटाइटिस दिवस:
विश्व हेपेटाइटिस दिवस साल 2010 से मनाया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा चिह्नित किए गए आठ वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मई 2010 में एक प्रस्ताव पारित कर यह दिवस मनाने की घोषणा की थी। इससे पहले क्रोनिक वायरल हैपेटाइटिस के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विश्व हेपेटाइटिस एलायंस ने साल 2008 में अभियान चलाया था। 28 जुलाई प्रोफेसर बारूक ब्लमबर्ग का जन्मदिन है, उन्होंने हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज की थी। उन्हें इस खोज के लिए साल 1976 में चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

हेपेटाइटिस के बारे में जाने:
हेपेटाइटिस वायरस के काऱण होने वाली यह एक संक्रामक बीमारी है। यह बीमारी मनुष्य के साथ बंदरों की प्रजाति के लीवर को भी संक्रमित करती है, जिस कारण से लीवर में सूजन और जलन पैदा होती है। हेपेटाइटिस यकृत की सूजन है, जिसे यकृत के ऊतकों में सूजन वाली कोशिकाओं की मौजूदगी से पहचाना जाता हैं।

हेपेटाइटिस के लक्षण:
हेपेटाइटिस के मुख्य लक्षण में व्‍यक्ति की आंखें और शरीर का रंग पीला पड़ने लगता है। इस संक्रमण की मुख्य पहचान पीलिया, सफेद या काली दस्त, अतिसंवेदनशील त्वचा, भूख मिट जाना, अपच और उल्टी, पेट में दर्द, पेट में सूजन, थकान जैसे लक्षण है। इन लक्षणों के अतिरिक्त बीमार महसूस करना, सिरदर्द होना, चिड़चिड़ापन बढ़ना, अचानक शरीर नीला पड़ना इत्यादि भी हो सकते है।

हेपेटाइटिस से बचाव:
हेपटाइटिस, मॉनसून के दौरान अधिक फैलता है, इसलिए इस मौसम में तैलीय, मसालेदार, मांसाहारी और भारी खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। इस बीमारी से बचने के लिए शाकाहारी आहार, ब्राउन राइस, हरी पत्तेदार सब्जियां, विटमिन सी युक्त फल, पपीता, नारियल पानी, सूखे खजूर, किशमिश, बादाम और इलायची का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए।

90 प्रतिशत से अधिक नवीन हेपेटाइटिस बी संक्रमण मां-से-बच्चे में संचारित और बचपन के दौरान होता है। अन्य उच्च ज़ोखिम समूहों में निम्नलिखित शामिल हैं:

1- वह लोग, जो कि इंजेक्शन के माध्यम से मादक पदार्थों का सेवन करते हैं।
2- वह पुरूष, जो कि पुरूष के साथ यौन संबंध रखते हैं।
3- वह लोग, जो कि टैटू या एक्यूपंक्चर कराते है।
4- वह लोग, जो कि हेपेटाइटिस बी से पीड़ित सहभागी के साथ रहते है।
5- स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्त्ता।

Spread the love

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *