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नई दिल्ली । अगले साल रिकॉर्ड चीनी भंडार होने की उम्मीद को देखते हुये चीनी उद्योग के संगठन एनएफसीएसएफ ने बुधवार को सरकार से चीनी के बजाय अधिकएथनॉल बनाने की अनुमति देने का आग्रह किया है। इसके साथ ही 70 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दिये जाने का भी आग्रह किया है। राष्ट्रीय चीनी कारखाना सहकारिता महासंघ (एनएफसीएसएफ) ने कहा कि विपणन वर्ष 2019-20 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान देश में कुल 4.3 करोड़ टन चीनी भंडार होने का अनुमान है, जिसमें 1.45 करोड़ टन का इस साल का बचा स्टॉक और 2.85 करोड़ टन अगले साल होने वाला चीनी उत्पादन शामिल होगा। एनएफसीएसएफएल के अध्यक्ष दिलीप वाल्से पाटिल ने संगठन की 60वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “अगला साल सबसे चुनौतीपूर्ण होने वाला है। वर्ष के दौरान चीनी की कुल उपलब्धता 4.30 करोड़ टन होगी, जो देश के चीनी इतिहास में एक नया कीर्तिमान होगा।” उन्होंने कहा कि इस स्थिति से बचने के लिये चीनी के बजाय अधिक से अधिक एथनॉल बनाने में गन्ने का इस्तेमाल करने और कम से कम 70 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही इस स्थिति को देखते हुये पुख्ता नीतियां लेकर आगे आएगी। निर्यात के बारे में पाटिल ने कहा कि सरकार जल्द से जल्द निर्यात नीति की घोषणा करेगी और चीनी निर्यात बढ़ाने के लिये विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप राजकोषीय समर्थन देगी। उन्होंने संकट के समय में चीनी उद्योग की मदद के लिए जल्द ही मूल्य स्थिरीकरण कोष के निर्माण की भी मांग की। पाटिल ने सरकार से सभी वित्त लागतों की गणना करने का अनुरोध किया, जिसमें चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) फिर से तय करना शामिल है, ताकि इसे उत्पादन की औसत लागत के बराबर लाया जा सके। उन्होंने कहा, “एक बार जब हम ऐसा कर लेते हैं, तो देश के चीनी क्षेत्र के सामने जो मौजूदा वित्तीय संकट है, वह आने वाले वर्षों में कम होगा और वित्तीय रूप से मजबूत चीनी उद्योग के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।”

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By admin

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