नई दिल्ली,। संचार उपकरणों की महत्ता पर बल देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बुधवार को कहा कि लोगों के लिए ‘सबसे बड़ी सजा’ तब होती है जब उनके पास संचार के साधन न हो। सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने यहां सामुदायिक रेडियो के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने की प्रशंसा भी की। उन्होंने कहा, ‘‘ हमने बहुत सारा काम किया। कश्मीर में लोगों को देश के बाकी हिस्सों की भांति विकास का अधिकार नहीं मिला था। अतएव, उन्हें विकास का यह अधिकार मिला है। अनुच्छेद के ज्यादातर प्रावधान खत्म कर दिये गये। यह ऐतिहासिक निर्णय है। जो विकास जम्मू कश्मीर नहीं हासिल कर पाया, अब हासिल करेगा।’’ उन्होंने यह भी कहा, ‘‘ (वहां) लोगों को आरक्षण नहीं मिला, जो उन्हें अब मिलेगा। उन्हें शिक्षा का अधिकार नहीं है जो अब मिलेगा, उन्हें उन सरकारी योजनाओं से वंचित किया जा रहा था जो अच्छा कर रही ही हैं, लेकिन अब उन्हें उसके लाभ मिलेंगे। अब सभी कानून वहां लागू होंगे। अतएव, अब वे देश के शेष हिस्सों से अधिक रफ्तार से आगे बढ़ेंगे।’’ जावडेकर ने कहा कि फिलहाल भारत में स्थिति ऐसी है कि सभी के पास मोबाइल फोन हैं जिसके माध्यम से व्यक्ति एक शहर से दूसरे शहर में एक-दूसरे से बातचीत कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘ यह है संचार की ताकत एवं जरूरत … जब लोग सब कुछ अपने दिल में रख लेते हैं और उसके बारे में किसी को कुछ नहीं बता पाते तो यह सबसे बड़ी सजा होती है। जब आप किसी से बातचीत नहीं कर सकते, आप किसी से संपर्क नहीं कर सकते, आपके पास संवाद के लिए कोई उपकरण नहीं होता तो यह सबसे बड़ी सजा होती है।’’ संयोग से उनका बयान केंद्र सरकार द्वारा पांच अगस्त को अनुच्छेद के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने के बाद कश्मीर घाटी में संचार सेवाओं पर लगायी गयी पाबंदियों के बीच आया है। मंत्री ने 2018 और 2019 के लिए पांच श्रेणियों में पुरस्कार दिये।

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