स्पेस प्रहरी/शुभम अग्रवाल: विश्व स्तनपान सप्ताह सारे विश्व में स्तनपान को प्रोत्साहित करने और दुनिया के शिशुओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष में 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है।  स्तनपान एक सार्वभौमिक उपाय है, जो कि हर व्यक्ति को जीवन में न्यायसंगत शुरुआत देता है। यह सारे विश्व में महिलाओं और शिशुओं के स्वास्थ्य, कल्याण और उत्तरजीविता को बढ़ाता है। ‘स्तनपान’ असमानता, संकट और गरीबी से युक्त संसार में शिशुओं और माताओं के आजीवन बेहतर स्वास्थ्य का आधार है। मां का दूध बच्चे के लिए अमृत से कम नहीं। यह न सिर्फ शिशु के सर्वांगीण पोषण के लिए जरूरी है, बल्कि इससे मां को भी मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य लाभ होता है। जन्म के शुरुआती एक घंटे में शिशु के लिए मां का दूध अत्यन्त जरूरी है। प्रसव के बाद शुरुआती एक घंटे के दौरान स्तनपान शिशु के लिए अत्यंत आवश्यक है। हैरत की बात है कि उत्तर प्रदेश में चार में से केवल एक शिशु को प्रसव के बाद शुरुआती एक घंटे में मां का दूध नसीब हो पाता है। इतना ही नहीं, 10 में से केवल चार बच्चे ही छह महीने तक नियमित स्तनपान कर पाते हैं। उन्हें तीन से चार महीने के भीतर ही पानी, जूस, ऊपर का दूध और खाना देना शुरू कर दिया जाता है। इससे उनका पोषण बाधित होता है। 

मुस्लिम गर्ल्स डिग्री कॉलेज की एनएसएस कार्य्रकम अधिकारी व उत्तर प्रदेश सरकार की “मुस्कुराएगा इंडिया पहल” के अंतर्गत मेन्टल हेल्थ कॉउंसलर शिखा कौशिक का कहना है कि स्तनपान करने से पूरी दुनिया में लगभग आठ हजार जिंदगियां बचती हैं। बावजूद इसके स्तनपान को लेकर अभी भी लोगों में काफी भ्रांतियां फैली हैं। आज भी लोगों में स्तनपान की जरूरतों के प्रति जागरूकता की कमी है। विश्व स्तनपान सप्ताह 1 अगस्त 7 अगस्त तक प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। इस वर्ष मैंने खुद पहल करते हुए कई ग्रामीण महिलाओं को स्तनपान से जुड़े फायदे व उसके बच्चो के प्रति होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने यह भी बताया कि इस सप्ताह का उद्देश्य ही यही है कि लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा सके कि यदि सही समय पर समुचित स्तनपान नहीं कराया जाए तो बच्चे व मां को क्या नुकसान हो सकते हैं। जन्म के बाद मां का दूध ही शिशु को संक्रामक रोगों से बचाता है। प्रसव के बाद पहले कुछ दिनों तक आने वाला दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं, पीने से शिशु की इम्यूनिटी बनी रहती है और वह रोगों से दूर रहता है। उन्होंने बताया क‍ि उत्तर प्रदेश में हर पांचवें शिशु को छह माह के अंदर ही बोतल से दूध पिलाया जाता है। इससे संक्रमण का खतरा रहता है। प्रदेश में स्तनपान की स्थिति सुधारने के लिए चिकित्सकीय संस्थान, डॉक्टर-नर्स व परिवार सभी को साथ आना होगा। मां का दूध शिशु के लिए प्रथम प्राकृतिक आहार है, यह उन सभी ऊर्जावान और पोषक तत्वों को प्रदान करता है जिनकी आवश्यकता शिशु को जीवन के प्रथम माह में होती है। छह माह की अवस्था के बाद से एक वर्ष तक मां का दूध शिशु की आवश्यकता को आधा पूरा कर पाता है तथा दूसरे वर्ष के दौरान शिशु के पोषण की एक तिहाई आवश्यकता ही पूरी हो पाती है। स्‍तनपान एक स्‍वाभाविक क्रिया है, इसे व्यवहार में सीखा भी जाता है। माताओं और अन्य देखभालकर्त्ताओं को सर्वोत्तम स्तनपान (जीवन के प्रथम छह महीनों तक केवल स्तनपान और दो वर्ष या उससे अधिक तक उम्र-उपयुक्त, पर्याप्त पौष्टिक और सुरक्षित अनुपूरक खाद्य पदार्थों के साथ स्तनपान जारी रखना) की स्थापना और रखरखाव के लिए सक्रिय सहयोग की आवश्यकता होती है।

विश्व स्तनपान सप्ताह-2020 का उद्देश्य:-
स्तनपान से संबंधित योजनाओं की कमियों के बारे में लोगों को जागरूक करना तथा अपर्याप्त स्तनपान से मां व शिशु के स्वास्थ्य पर बढऩे वाले खर्चे को बारे में बताना।

डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ की अनुशंसा:
1. जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने की शुरुआत की जानी चाहिए।
2. छह महीने की अवस्था तक केवल स्तनपान (शिशु को बिना किसी अतिरिक्त आहार या पेय, यहां तक कि पानी भी नहीं दिया जाना चाहिए, जब तक कि चिकित्सा कारण न हों, केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए) कराया जाना चाहिए।
3. बच्चे की मांग पर स्तनपान- बच्चा को दिन या रात में उसकी भूख के आधार पर स्तनपान कराया जाना चाहिए।
बोतल, निप्पल या चुसनी का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
4. छह महीने के बाद पर्याप्त पौष्टिक और सुरक्षित अनुपूरक (ठोस) खाद्य पदार्थों के साथ दो वर्ष या उससे अधिक तक स्तनपान कराया जाना चाहिए।

सर्वोत्तम स्तनपान का शिशु के संपूर्ण जीवन पर सकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव पड़ता है, जो कि इस प्रकार है:-
बच्चा:
1. संक्रामक रोगों का मुकाबला।
2. डायरिया/दस्त की व्यापकता और गंभीरता में कटौती।
3. एक्यूट ओटिटिस मीडिया और श्वसन संक्रमण में कमी।
4. दंत क्षय और दांतों की अपूर्ण स्थिति की रोकथाम।
5. बुद्धि में विस्तार।
6. बंधन में बढ़ोत्तरी।

मां:
1. तीव्र मातृ स्वास्थ्य लाभ और प्रसवोत्तर वज़न में कटौती।
2. जन्म के अंतर को बनाए रखने में सहायक।
3. स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर के ज़ोखिम में कमी।
4. मातृ प्रसवोत्तर अवसाद में कटौती।
5. उच्च रक्तचाप के ज़ोखिम में कमी।

स्तनपान से मां को होने वाले लाभ:-
1. यह प्रसव के बाद होने वाले रक्त स्राव को रोकता है तथा मां में खून की कमी होने के खतरे को कम करता है।
2. स्तनपान कराने वाली ज्यादातर माताओं में मोटापे की शिकायत नहीं होती।
3. यह शिशुओं के जन्म में अंतर रखने में भी सहायक होता है।
4. स्तन और अंडाशय के कैंसर के खतरे को कम करता है।
5. यह हड्डियों की कमजोरी से बचाता है।

ऊपरी दूध पिलाने के नुकसान:-
1. संक्रामक रोगों की आशंका
2. सही मात्रा में प्रोटीन, फैट, विटामिन व मिनरल न मिल पाना
3. एलर्जी का खतरा
4. बौद्धिक क्षमता के विकास में बाधा

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