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नई दिल्ली । लोकसभा में सोमवार को उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक 2019 पेश किया गया जिसमें उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 करने का प्रावधान किया गया है। निचले सदन में संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधि मंत्री रविशंकर प्रसद की ओर से उक्त विधेयक पेश किया। अभी शीर्ष न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) समेत 31 न्यायाधीश हैं। उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) कानून, 1956 आखिरी बार 2009 में संशोधित किया गया था, जब सीजेआई के अलावा न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 की गई। भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया था। भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि न्यायाधीशों की कमी के कारण कानून के सवालों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में फैसला लेने के लिए आवश्यक संवैधानिक पीठों का गठन नहीं किया जा रहा। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि भारत के उच्चतम न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। 1 जून 2019 तक उच्चतम न्यायालय में 58,669 मामले लंबित थे। भारत के प्रधान न्यायाधीश ने सूचित किया है कि न्यायाधीशों की अपर्याप्त संख्या शीर्ष अदालत में मामलों के लंबित होने के मुख्य कारणों में से एक कारण है। इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायमूर्तियों तथा न्यायाधीशों की पोषक काडर संख्या 906 से बढ़कर 1079 हो गई है। इसके कारण उच्च न्यायालय स्तर पर मामलों के निपटान में वृद्धि हुई है जिसका कारण उच्चतम न्यायालय में अधिक संख्या में अपीलें किया जाना है। ऐसे में उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को वर्तमान में भारत के प्रधान न्यायमूर्ति को छोड़कर 30 से बढ़ाकर 33 करने के लिये उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) कानून, 1956 का और संशोधन करने का प्रस्ताव है।

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