-होटान एयरबेस पर इन हथियारों को चीन ने किया तैनात
-मैराथन बैठकें, लेकिन चीन की चालबाजी जारी

नई दिल्ली: लद्दाख में जारी गतिरोध को हल करने के लिए भारत के साथ डिप्लोमेटिक और सैन्य स्तर पर बातचीत के दौरान भी चीन अपनी नापाक चाल से बाज नहीं आ रहा है। भारत और चीन के बीच बातचीत के दौरान बनी सहमति के अनुरूप चीनी सैनिक पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से नहीं हटे हैं। शनिवार को ली गई सैटेलाइट इमेज से खुलासा हुआ है कि चीनी सेना अब भी पैंगोंग के फिंगर 4 से तीन किलोमीटर की दूरी पर जमी हुई है। हालांकि पहले यह दावा किया गया था कि चीनी सेना फिंगर 4 से फिंगर 5 तक वापस लौट गई है और कुछ चीनी सैनिक ही रिज लाइन पर मौजूद हैं। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों के गैर प्रतिबद्ध रवैये को देखते हुए भारत ने भी चौकसी बढ़ा दी है। 

सूत्रों के मुताबिक चीनी सेना पहले कुछ पीछे हटी थी, लेकिन फिर वापस आ गई, इसलिए चीनी सैन्य प्रतिनिधियों के साथ बैठक में बनी आम सहमति को लेकर लगातार जांच करने की जरूरत है। बातचीत के बाद पाया गया था कि भारतीय और चीनी सेना पेंगांग लेक में दो किलोमीटर तक पीछे हट गई थी और फिंगर-4 खाली हो गया था। लेकिन, चीनी अभी भी रिज लाइन के पास डटे हुए हैं। यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि चीनी सेना फिंगर 4 के पास मौजूद थे, जो कि पारंपरिक रूप से भारत के अधीन क्षेत्र में है। चीनी सेना फिंगर 4 से लेकर फिंगर 8 तक भारतीय सीमा में आठ किमी अंदर तक आ गई थी। भारत का मानना है कि एलएसी फिंगर 8 से शुरू होती है।

सैटेलाइट तस्वीरों के हुआ खुलासा

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट डेटरेस्फा की सैटलाइट तस्वीर के अनुसार, फॉक्सहोल पॉइंट के पश्चिम में 3 किलोमीटर की दूरी पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की उपस्थिति बनी हुई है। वहीं इस कैंप से कुछ किलोमीटर पीछे चीनी सेना के सपोर्ट कैंप भी मौजूद हैं। डेटरेस्फा की दूसरी सैटलाइट तस्वीरों के अनुसार, चीन ने लेह से 382 किलोमीटर दूर शिनजियांग प्रांत में होटान एयरबेस को भारत के खिलाफ रणनीतिक रूप से मजबूत कर दिया है। यहां फाइटर एयरक्राफ्ट के अलावा, अर्ली वार्निंग अवाक्स एयरक्राफ्ट और एयर डिफेंस यूनिट्स की तैनाती की गई है।

चीन ने मिलिट्री ड्रिल की आड़ में सेना तैनात की

सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी ने बताया कि दोनों देशों के बीच हाल ही में हुई बैठकों में भारत ने कहा कि चीन ने मिलिट्री एक्सरसाइज की आड़ में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास बड़े पैमाने पर हथियारों से लैस सैनिकों को तैनात किया है। चीन की इस हरकत को कमर्शियल सैटेलाइट से आसानी से देखा जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि भारत ने डेपसांग के मैदान और डीबीओ सेक्टर में चीनी सेना की ओर से किए जा रहे निर्माण पर आपत्ति दर्ज कराई है। भारत ने ये भी मुद्दा उठाया कि पेट्रोलिंग पॉइंट-10 से पेट्रोलिंग पॉइंट-13 तक गश्ती के दौरान भारतीय सेना के सामने चीनी सेना दिक्कतें पैदा करती है।

ये पॉइंट अब भी विवाद का कारण

पेट्रोलिंग पॉइंट 14 कहे जाने वाले गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सेना के बीच तीन किलोमीटर की दूरी है, जबकि पेट्रोलिंग पॉइंट 15 के पास, जवानों के बीच दूरी लगभग आठ किलोमीटर है। लेकिन, तनाव का क्षेत्र हॉट स्प्रिंग, यानी पेट्रोलिंग पॉइंट-17 बना हुआ है, जहां 40-50 जवान केवल 600-800 मीटर की दूरी पर तैनात है। दोनों देशों के बीच बनी सहमति के बाद चीनी सेना पीछे हटी थी, लेकिन वापस आ गई।

रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा था भारत शांति चाहता है 

भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख के अपने दौरे के दौरान कहा था कि भारत शांति चाहता है, लेकिन चीन के साथ वार्ता के अंतिम नतीजे निकलने की कोई गारंटी नहीं है। सिंह ने तनावग्रस्त सीमावर्ती इलाकों में भी जमीनी स्थिति का जायजा लिया।

मैराथन बैठकें, लेकिन चीन की चालबाजी जारी

मंगलवार को दोनों देशों के बीच चुशूल में 15 घंटे तक चली कोर कमांडर स्तर की चौथी बातचीत में भी कोई हल निकलता नहीं दिखा। चीनी सेना पैंगोंग त्सो और देपसांग में अब भी भारतीय सेना के काफी करीब जमी हुई है। चीन की इस चालबाजी से डिसइंगेंजमेंट और तनाव कम करने की प्रक्रिया उलझ गई है। वहीं, भारत ने दो टूक कह दिया है चीनी सैनिकों को इन इलाकों में भी पुरानी स्थिति में लौटना ही होगा।

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