गायनेकोलॉजिकल कैंसर से जूझने वाली महिलाओं के लिए ओपीडी सेवा की शुरुआत
-सर्वाइकल कैंसर के 90 फीसदी केस में मरीज के ठीक होने की रहती है संभावना
-मुजफ्फरनगर में अब दिल्ली के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की मिलेंगी सेवाएं

संवाददाता, स्पेस प्रहरी
मुजफ्फरनगर. दिल्ली-एनसीआर के प्रसिद्ध अस्पतालों में अग्रणी मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पटपड़गंज ने अब अपनी सेवाओं का विस्तार मुजफ्फरनगर में भी कर लिया है. यहां कैंसर मरीजों के लिए ओपीडी सेवा शुरू की गई है. खासकर, गायनेकोलॉजिकल कैंसर यानी महिलाओं से जुड़े कैंसर के मरीज अब इस ओपीडी का लाभ ले सकेंगे. मुजफ्फरनगर के सेवा मेडिकेयर के साथ मिलकर इस ओपीडी का आगाज किया गया है.

मौजूदा वक्त में कैंसर के इलाज के लिए नए-नए एडवांस मेथड्स मौजूद हैं लेकिन कैंसर के प्रति जानकारी का अभाव भी दूर करने की जरूरत है. मैक्स अस्पताल पटपड़गंज लोगों को न सिर्फ कैंसर के प्रति अवेयर करता है, बल्कि अस्पताल लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और एडवांस तरीकों से इलाज भी देता है.

मुजफ्फरनगर में महिला कैंसर मरीजों के लिए ओपीडी की शुरुआत कर मैक्स अस्पताल पटपड़गंज ने अपनी हेल्थ सेवाओं की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है. इस ओपीडी की लॉन्चिंग मैक्स अस्पताल पटपड़गंज मैं सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (गायने) की सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर स्वास्तिक की मौजूदगी में हुई. डॉक्टर स्वास्ति ही इस ओपीडी में महीने के हर तीसरे शनिवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक मरीजों को देखेंगी. मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्र के मरीज यहां डॉक्टर स्वास्तिक से कंसल्ट कर सकेंगे.

महिलाओं में गायनेकोलॉजिकल कैंसर बहुत ही आम है. कैंसर के प्रति अवेयरनेस की कमी, टेस्ट के लिए सही पैथोलॉजी का न होना जैसे तमाम कारणों के चलते ज्यादातर महिलाओं को इस कैंसर का एडवांस स्टेज में जाकर पता लग पाता है. फिर इलाज में देरी भी इससे परिणामों को घातक बना देती है. ऐसे में ये जरूरी है कि सही वक्त पर कैंसर डायग्नोज हो सके, और फिर वक्त से एडवांस ट्रीटमेंट किया जा सके.

देश और दुनिया में गायनेकोलॉजिकल कैंसर में भी ओवेरियन और सर्विकल (गर्भाशय) कैंसर के केस सबसे ज्यादा है. हालांकि, सर्वाइकल कैंसर का ग्राफ अब नीचे जा रहा है लेकिन आज भी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सबसे ज्यादा केस सर्वाइकल कैंसर के ही पाए जाते हैं. भारतीय महिलाओं में ओवेरियन कैंसर के केस काफी ज्यादा देखने को मिल रहे हैं और पिछले कुछ सालों में इसका ग्राफ काफी ऊपर गया है.

दिल्ली के मैक्स अस्पताल पटपड़गंज में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (गायने) की सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर स्वास्ति ने गायनेकोलॉजिकल कैंसर के बारे में बताया, ”यूं तो ज्यादातर एचपीवी इंफेक्शन असिम्पोटोमैटिक होते हैं और कुछ समय के अंदर ही इम्यून सिस्टम से वायरस खुद ही खत्म हो जाते हैं, लेकिन लगातार संक्रमण से गर्भाशय में कुछ प्री-कैंसर बदलाव होने का खतरा रहता है जो धीरे-धीरे सर्वाइकल कैंसर में तब्दील हो जाता है. सर्वाइकल कैंसर के 99 फीसदी केस का कारण एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) होता है. मुजफ्फरनगर में इस ओपीडी के शुरू होने से मरीजों को समय पर डॉक्टर को दिखाने का मौका मिल सकेगा, साथ ही ग्रामीण इलाकों में होने के बावजूद वो अच्छा ट्रीटमेंट पा सकेंगे.”

ग्लोबोकैन 2020 इंडिया फैक्टशीट रिपोर्ट के मुताबिक- भारत में कैंसर के कुल केस में 28 फीसदी केस
गायनेकोलॉजिकल कैंसर के पाए गए. इनमें ब्रेस्ट कैंसर, सर्विक्स कैंसर, ओवरी कैंसर, वजाइना कैंसर और वल्वा कैंसर समेत सभी तरह के गायनेकोलॉजिकल कैंसर केस शामिल थे. इस साल देश में कुल कैंसर केस 13,24,413 रजिस्टर हुए, जिनमें से गायनेकोलॉजिकल कैंसर के मरीज 3,68,956 (28%) थे. सबसे ज्यादा बीमारी और मौत के केस ब्रेस्ट कैंसर के पाए गए. ब्रेस्ट कैंसर के 1,78,361 नए केस आए और 90,408 मरीजों की मौत हुई. सर्वाइकल कैंसर महिलाओं को होने वाले कैंसर में दूसरे नंबर पर रहा. इसके 1,35,929 केस और 75,290 मरीजों की मौत हुई.

डॉक्टर स्वास्ति ने इस बारे में कहा, ”पूरी दुनिया में ब्रेस्ट कैंसर के सबसे ज्यादा केस भारत में हैं जहां हर साल 25 में से 1 मरीज के अंदर ब्रेस्ट कैंसर डायग्नोज होता है. अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों से तुलना की जाए तो ये बहुत ज्यादा है, क्योंकि वहां हर साल 8 मरीजों में 1 को ब्रेस्ट कैंसर पाया जाता है. पूरी दुनिया की बात की जाए तो 40 साल से कम उम्र की महिलाओं की 7 फीसदी आबादी ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित है, जबकि भारत में ये आंकड़ा डबल यानी 15 फीसदी है. भारत का एक आंकड़ा ये है कि यहां सर्वाइकल कैंसर के कारण हर 7 मिनट में एक महिला की मौत होती है. पांच सालों पर गौर करें तो इलाज के बिना इस कैंसर से बचने के चांस 50 फीसदी से कम ही रहते हैं लेकिन समय पर बेहतर इलाज और प्रॉपर स्क्रीनिंग के जरिए जिंदगी के दिन बढ़ने की काफी ज्यादा संभावना रहती है.”

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने के कई कारण हैं. अच्छी लाइफस्टाइल न होना, शराब का सेवन, स्मोकिंग, मोटापा, स्ट्रेस, गलत खान-पान जैसे तमाम कारण हैं जो यंग जनरेशन में भी ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ा रहे हैं. हालांकि, इन तमाम समस्याओं को दूर कर ब्रेस्ट कैंसर से बचाव किया जा सकता है.

मैक्स अस्पताल पटपड़गंज में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (गायने) की सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर स्वास्ति ने कहा, ”कैंसर विज्ञान के क्षेत्र में बहुत ज्यादा तरक्की तो हुई है, लेकिन भारत की 15 फीसदी आबादी ही समय पर एडवांस ट्रीटमेंट ले पाती है. कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अगले एक दशक में इसके डबल होने की आशंका है. ऐसे में ये जरूरी है कि लोगों के बीच कैंसर के प्रति चेतना जगाई जाए ताकि शुरुआती स्टेज में ही कैंसर का पता चल सके. क्योंकि अब तक ये देखने में आया है कि ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित ज्यादातर महिला मरीजों को इसका पता तब चल पाता है जब कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल जाता है. एडवांस स्टेज में कैंसर के पहुंचने पर इसका इलाज बहुत मुश्किल हो जाता है.”

कैंसर के बारे में सभी जानते हैं कि ये जानलेवा बीमारी है. साथ ही इसका पता भी एडवांस स्टेज में जाकर लग पाता है, जिससे इलाज में और मुश्किल हो जाती है. ऐसे में मुजफ्फरनगर में दिल्ली के मैक्स अस्पताल पटपड़गंज ने जो ओपीडी सेवा शुरू की है, उससे यहां की महिलाओं को बहुत लाभ पहुंचेगा. वक्त रहते जांच पड़ताल कर बीमारी डायग्नोज़ हो सकेगी. इस ओपीडी में मरीजों को देखकर उनका मैक्स अस्पताल पटपड़गंज में मौजूद एडवांस ट्रीटमेंट मेथड्स की मदद से इलाज किया जा सकेगा.
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