नई दिल्ली, । ई-सिगरेट समेत इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम्स (ईएनडीएस) को प्रोत्साहित करने वाले व्यापार प्रतिनिधियों के एक प्रमुख निकाय ने देश में इस प्रकार के उपकरणों को प्रतिबंधित करने के लिये अध्यादेश की आवश्यकता पर सवाल खड़े किए। व्यापार निकाय ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उत्पादन, आयात, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के अध्यादेश पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के काम करने संबंधी रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि पूरी श्रेणी के लिए ऐसा करने के पीछे के ‘‘तर्क में गंभीर खामियां’’ हैं। ईएनडीएस के व्यापार प्रतिनिधियों के संयोजक प्रवीण रिखी ने एक बयान में कहा, ‘‘ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने के मामले को अदालतों से भी कोई समर्थन नहीं मिला। इसके बाद इन्हें नशीले पदार्थों के तौर पर वर्गीकृत किए जाने की बार-बार कोशिश की गई। इसे भी कानून में कोई आधार नहीं मिला। अध्यादेश लाना सभी नियमों एवं प्रक्रियाओं को दरकिनार कर लिए गए एक पूर्व निर्धारित फैसले को दर्शाता है। यह अभूतपूर्व है।’’ मसौदा अध्यादेश ‘ई सिगरेट प्रतिबंध अध्यादेश 2019’ में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उत्पादन, आयात, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध की बात की गई है और उल्लंघन करने वालों के लिए कारावास की सजा का प्रावधान है। मसौदा अध्यादेश के विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए इसे एक मंत्रियों के समूह (जीओएम) के पास भेजा जाएगा। आईसीएमआर रिपोर्ट में यह कहते हुए ‘ईएनडीएस’ पर पूर्ण प्रतिबंध की सिफारिश की गई है कि इनका इस्तेमाल करने से धूम्रपान नहीं करने वालों को निकोटिन की लत लग सकती है। आईसीएमआर की इस रिपोर्ट पर निकाय ने आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट तीसरे पक्ष के अनुसंधान का सारांश है और आईसीएमआर ने अपने आप कोई अनुसंधान नहीं किया जिसका दस्तावेजीकरण किया गया हो। इन उपकरणों का प्रयोग करने वाले 3000 से अधिक लोगों ने हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया था कि वे ईएनडीएस को वैध बनाएं। उन्होंने दावा किया था कि जब से उन्होंने पारम्परिक सिगरेट के स्थान पर ई सिगरेट का प्रयोग आरंभ किया है, उनके स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ है। पंजाब, कर्नाटक, केरल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, झारखंड, राजस्थान और मिजोरम समेत कुछ राज्यों ने पहले ही इनके प्रयोग एवं बिक्री पर रोक लगा दी है।

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