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पोलैंड की यात्रा पर विदेश मंत्री जयशंकर, आर्थिक-कूटनयिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण

वारसा, । भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज यूरोपीय देश पोलैंड की आधिकारिक यात्रा पर हैं। पिछले 30 सालों में उच्च स्तरीय मंत्री स्तर पर वार्ता के लिए पूर्वी यूरोप में यह पहली यात्रा है। इससे पहले 2009 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और 2017 में उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी की आधिकारिक यात्रा हुई थी। विदेश मंत्री की इस यात्रा का प्रमुख कारण संयुक्त राष्ट्र में पोलैंड से मिले समर्थन के लिए आभार जताना है।

पोलैंड ने यूएन में कश्मीर मुद्दे पर भारत का किया समर्थन कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाने की पाकिस्तान की कोशिशों का भारत जोरदार तरीके से खंडन करता रहा है। पोलैंड ने कश्मीर पर भारत के स्टैंड का ही समर्थन किया। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद में भी पोलैंड कश्मीर पर भारत का समर्थन कर चुका है। न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की सदस्यता का भी पोलैंड ने समर्थन किया है। नाटो देशों का सदस्य पोलैंड एनएसजी का भी सदस्य है।

भारत और पोलैंड के संबंधों का दायरा महज कूटनीतिक नहीं है। पोलैंड का महत्व भारत के लिए आर्थिक तौर पर भी है। पोलैंड को स्थिर आर्थिक विकास दर के कारण यूरोप का टाइगर भी कहा जाता है। 4 फीसदी से कुछ अधिक की रफ्तार से पोलैंड की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और इसकी जीडीपी भी करीब 520 बिलियन डॉलर है। यूरोप में सबसे बड़ा कोयला भंडार भी पोलैंड के ही पास है और कोयला खपत के लिहाज से भी सबसे बड़ा देश है। भारत के कोयला खदानों में दशकों से पोलैंड के उपकरणों का प्रयोग हो रहा है। पोलैंड की कई बड़ी कंपनियां भारतीय कोयला खदान में निवेश के लिए दिलचस्पी जाहिर कर चुकी हैं।

भारत और पोलैंड के बीच अभी व्यापारिक संबध हैं और भविष्य में इनके विस्तार की संभावना है। यूरोपियन यूनियन में पोलैंड की भागीदारी बढ़ने के लिहाज से भारत के लिए भी अपार संभावनाएं हैं। पोलैंड में कुल 221 बिलियन डॉलर का है जिसमें से सिर्फ 1 फीसदी निर्यात भारत के साथ है। ऑटो पार्ट्स, डेटा प्रॉसेसिंग मशीन पोलैंड के निर्यात के प्रमुख क्षेत्र हैं और मुख्य तौर पर यह निर्यात जर्मनी में होता है। क्लीन टेक्नॉलजी, माइनिंग, खाद्यान्न और फूड प्रॉसेसिंग ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें भारत में निर्यात के लिए पोलैंड की काफी दिलचस्पी है।

भारतीय अर्थशास्त्रियों के लिए पोलैंड की नियमित स्थिर विकास दर अध्ययन का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सिर्फ 10 साल में इस यूरोपीय देश ने 50 फीसदी गरीबी को कम कर 29 फीसदी तक पहुंचा दिया। 2008 की वैश्विक मंदी के दौर में पोलैंड यूरोप के कुछ चुनिंदा बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से था जिसकी विकास दर पर प्रभाव नहीं पड़ा।

एस. जयशंकर का पोलैंड दौरा महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वह इस सप्ताह इस देश की यात्रा करनेवाले एक मात्र महत्वपूर्ण हस्ती नहीं हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी शनिवार को पोलैंड की राजधानी पहुंच रहे हैं। 1 सितंबर 1939 को ही जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण कर द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत की थी। पोलैंड में इन दिनों दक्षिणपंथी सरकार की नीतियों की खासी चर्चा है और ऐसे वक्त में ट्रंप के दौरे पर पूरे विश्व की नजर रहेगी।

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