नई दिल्ली, । राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पंजाब सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि राज्य में अवैध रेत खनन की कोई गतिविधि नहीं हो। अधिकरण ने इस बात का जिक्र किया कि खनन के कई पट्टे वैधानिक प्रक्रिया का पालन किये बगैर दे दिये गए। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों की सदस्यता वाली एक समिति को संबद्ध व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने और अवैध खनन करने वालों से मुआवजे की राशि एक महीने के अंदर वसूलने का भी निर्देश दिया। पीठ ने कहा, ‘‘इस तरह की रिपोर्ट की एक प्रति पंजाब के मुख्य सचिव को भी दी जाए ताकि अनुपालन सुनिश्चित हो सके क्योंकि इसमें कई विभाग शामिल हो सकते हैं। साथ ही, उपचारात्मक कार्रवाई की निगरानी मुख्य सचिव को करने की जरूरत है।’’ अधिकरण ने कहा, ‘‘वैधानिक प्राधिकार यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वैधानिक प्रक्रिया का अनुपालन होने तक कोई अवैध खनन नहीं हो। खान एवं भूगर्भ विभाग उपचारात्मक कार्रवाई कर सकता है जिसकी निगरानी मुख्य सचिव कर सकते हैं। मुख्य सचिव ई मेल के जरिये तीन महीने में एक अनुपालन रिपोर्ट सौंप सकते हैं।’’ गौरतलब है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, राज्य पर्यावरण आकलन प्राधिकरण, पंजाब और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की सदस्यता वाली समिति ने अधिकरण से कहा था कि उसने पाया है कि आवंटित किये जाने वाले ज्यादातार खनन स्थल नदी के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र में हैं। पंजाब निवासी गगणेश्वर सिंह ने राज्य में रेत खनन की नीलामी के बारे में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि प्रदेश सरकार ने बगैर कोई जिलावार सर्वेक्षण किये खनन पट्टे देने का फैसला किया।

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