बुलंदशहर/शुभम अग्रवाल: चाँद की चांदनी से ज्यादा प्रकाशमय आसमान का नजारा रविवार को देखने लायक बन गया था, विशेषज्ञों ने यह माना कि जिसने नजारा नहीं देखा समझो जीवन का सत्य नहीं देखा। लोगो की नजरें जहाँ तक गयीं वहां तक सिर्फ मोमबत्ती,दीये, मोबाइल फ्लैशलाइट,टोर्च के अलावा कुछ नहीं नजर आया। पूरे देश में इस कदर कोरोना को ख़तम करने के उद्देशय से की गयी मोदी की अपील का असर दिख रहा था मानो लोग बीती दिवाली की धूम भी फीका महसूस करने लगे हो। कुछ लोग आतिशबाजी भी कर रहे थे तो कुछ सुकून से बैठकर प्रकृति की सच्चाई को समझने की कोशिश कर रहे थे। जिधर देखा बस उधर लोगो में ख़ुशी की लहर बहती दिखाई दे रही थी। चाहे सरकारी व प्राइवेट अफसरान हो, कर्मचारी हो या गणमान्य व प्रतिष्ठित व्यक्ति लेकिन सभी के हाथ में ठीक 9 बजे से लेकर अगले 9 मिनट तक मोमबत्ती, दीये, मोबाइल फ्लैशलाइट और टोर्च ही दिखाई दिए। जो विभागीय लोग कोरोना से बचाव कार्य में जुटे होने के कारण घर नहीं जा सके तो उन्होंने भी बेझिझक अपने कार्यस्थल पर 9 मिनट देश के नाम किये। मोदी की अपील पूरा करने में न महिलाये, न बच्चे, न बुजुर्ग न पीड़ित कोई भी पीछे नहीं रहा सभी कोरोना से बचने के लिए आगे आये और आसपास के लोगो को भी इसके होने वाले नुक्सान व इससे बचाव कैसे करे सब कुछ एकदूसरे को समझाया। सड़को पर भी ऐसा नजारा किसी ने नहीं देखा था की जो जहाँ जा रहा था वही रुक गया और मोदी की अपील पर अम्ल करने लगा। जो भी व्यक्ति जिस लायक था उसने हरसंभव अपने प्रयास कर अधिक से अधिक मात्रा में लोगो को मोदी की अपील पूरी करने का अनुरोध भी किया और उसका प्रोत्साहन भी बढ़ाया। कोरोना वायरस संकट से निपटने में राष्ट्र के ‘‘सामूहिक संकल्प और एकजुटता’’ को प्रदर्शित करने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर ‘रविवार रात नौ बजे नौ मिनट तक’ करोड़ों देशवासियों ने अपने घरों की बत्ती बुझा दी और दीये, मोमबत्ती तथा मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाई।उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका है जब मोदी ने ‘लॉकडाउन’ के दौरान इस वैश्विक महामारी के खिलाफ लोगों को एकजुट करने की कोशिश की। लॉकडाउन से ठीक पहले 22 मार्च को ‘‘जनता कर्फ्यू ’’के दौरान भी लोगों ने प्रधानमंत्री की अपील पर ताली, थाली, और घंटी आदि बजा कर कोरोना वायरस संकट का मुकाबला कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों का उत्साह बढ़ाया था। रविवार रात नौ बजते ही, ज्यादातर घरों में बत्तियां बुझा दी गई और लोगों ने बालकनी व छतों पर खड़े होकर मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाई। जबकि, कइयों ने दीये और मोमबत्ती भी जलाये।

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