नई दिल्ली: रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) दिल्ली में कोरोनावायरस संक्रमण रोकने के लिए पांच हजार से अधिक लोगों की मदद कर रही है। यह लोग ऐसे श्रमिक हैं, जो देशव्यापी लॉकडाउन के लागू होने के बाद दिल्ली से अपने-अपने राज्यों के लिए रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। इन श्रमिकों को आरपीएफ न केवल दो वक्त का भोजन मुहैया करा रही है बल्कि इन्हें कोरोना को दूर भगाने के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं। इसके साथ ही संक्रमण को रोकने के लिए आरपीएफ ने खुद सैनिटाइजर तैयार करके इन लोगों को दिए हैं।

श्रमिकों को सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से कोरोनावायरस को परास्त करने का प्रशिक्षण भी रेलवे पुलिस दे रही है। दिल्ली में पुरानी दिल्ली, नई दिल्ली, निजामुद्दीन, आनंद विहार और सफदरजंग रेलवे स्टेशन के अलावा दिल्ली के आधा दर्जन छोटे, बड़े रेलवे स्टेशनों पर आरपीएफ ने निस्सहाय श्रमिकों के भोजन की व्यवस्था की है। गौरतलब है कि काम धंधे बंद होने के कारण श्रमिकों के समक्ष भोजन की समस्या उत्पन्न हो गई है। हजारों की तादाद में में श्रमिकों ने अपने-अपने गांव की ओर पैदल ही पलायन शुरू कर दिया था, जिससे दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में हजारों श्रमिकों की भीड़ एकत्र हो गई थी। श्रमिकों के इस तरह पलायन से कोरोनावायरस के संक्रमण का खतरा भी कई गुना बढ़ गया था।

सफदरजंग रेलवे स्टेशन थाना अध्यक्ष इंस्पेक्टर नितिन मेहरा ने कहा, “श्रमिकों के पलायन को रोकने के लिए विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर आरपीएस द्वारा 5000 से ज्यादा लोगों को दो वक्त का भोजन मुहैया कराया जा रहा है। इस दौरान हम सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं। श्रमिकों को भी सोशल डिस्टेंसिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही भोजन से पहले यहां पहुंचने वाले सभी श्रमिकों के हाथ सैनिटाइजर से साफ करवाए जाते हैं।”

सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर ही तैनात आरपीएफ अधिकारी सुनील चौबे ने कहा, “श्रमिकों को भोजन मुहैया कराने के साथ ही हम इन्हें बार-बार हाथ धोने, भीड़ में न जाने खांसते-छींकते समय रुमाल का इस्तेमाल करने जैसी जानकारियां दे रहे हैं। साथ ही हमने यहां आने वाले सभी श्रमिकों के लिए मास्क की व्यवस्था भी की है।”

बेलदारी का काम करने वाले शंकर ने कहा, “आरपीएफ से मिले भोजन व अन्य आवश्यक सामग्री के बाद अब हम खुद को दिल्ली में सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हमें यह बताया गया है कि भीड़ में जाने से खुद हमारे स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है, इसलिए फिलहाल अब हमने कहीं नहीं जाने का निर्णय किया है।”

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