डीएम बुलंदशहर व् एवरेस्टर रविंद्र कुमार को अमृत लाल नागर पुरस्कार से सम्मानित करते हुए डॉ0 रजनीश दुबे आईएएस, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा उ0प्र0 डॉ0 हरिओम, अध्यक्ष राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान एवं विशिष्ट अतिथि अश्विनी श्रीवास्तव IRTS, मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक IRCTC-लखनऊ।

बुलंदशहर(शुभम अग्रवाल): बुलंदशहर के डीएम रविंद्र कुमार को लखनऊ में यशपाल सभागार, हिंदी भवन में उनकी हिंदी पुस्तक “एवेरेस्ट – सपनों की उड़ान: सिफर से शिखर तक” के लिए 1 लाख रुपये के अमृत लाल नागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उ0प्र0 द्वारा वर्ष 2019-20 के लिए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ0 रजनीश दुबे आईएएस, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा उ0प्र0 डॉ0 हरिओम, अध्यक्ष राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान एवं विशिष्ट अतिथि अश्विनी श्रीवास्तव IRTS, मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक IRCTC-लखनऊ द्वारा प्रदान किया गया। आपको बता दें कि वर्ष 1981 में बेगूसराय, बिहार के एक किसान परिवार में जन्मे व वर्ष 2011 बैच के युवा आई0ए0एस0 अधिकारी रविन्द्र कुमार की साहसिक खेलों में विशेष रूचि रही है। अपने पर्वतारोहण को लेकर उन्होंने हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में दो पुस्तकें-‘मैनी एवरेस्ट्सः एन इन्स्पायरिंग जर्नी आॅफ ट्रांसफार्मिंग ड्रीम्स इन्टू रियलिटी’ एवं ‘एवरेस्ट: सपनों की उड़ान: सिफर से शिखर तक’ लिखी हैं। इसके साथ ही ‘अग्रवर्ती सकारात्मक मानसिक चित्रण’ नाम से वर्णित सफलता की अपनी कुंजी को समाज के साथ साझा करते हुए जीवन के विभिन्न एवरेस्ट फतह करने के अद्भुत तरीके को समझाया है। इसमें आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धान्त, प्राच्य योगियों द्वारा की गयी खोज, आधुनिक विश्वविद्यालय जैसे हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, लेनिनग्राद सैन्य प्रयोगशाला आदि द्वारा मानव मस्तिष्क पर किए गए प्रयोग शामिल हैं। उन्होंने अभी तक कई श्रेष्ठ अकादमिक लक्ष्यों को हासिल किया है। जहाजरानी में लगभग एक दशक तक सेवाएं देने के बाद वह वर्ष 2011 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए और वर्ष 2013 में अपने प्रथम प्रयास में एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने वाले भारत के प्रथम आईएएस अधिकारी के रूप में पहचाने जाने लगे। इतना ही नहीं इन्हे सिक्किम खेल रत्न अवार्ड, बिहार विशेष खेल सम्मान, कश्ती रत्न अवार्ड, अटल मिथिला सम्मान जैसे दर्जनों पुरस्कारों से नवाजा गया है। डीएम रविंद्र कुमार पूर्व में एक अच्छे तैराक और कराटे में ब्लैक बेल्ट रहे हैं साथ ही बंजी जम्पिंग, स्कूबा डाइविंग, घुड़सवारी, मैराथन दौड़ सहित सहित कई अन्य साहसिक कार्य कर चुके हैं।


हालाँकि वर्ष 2015 में अपने दूसरे एवरेस्ट अभियान के दौरान इन्हे नेपाल के भूकंप एवं हिमस्खलन का सामना भी करना पड़ा जिस दौरान इन्हे वहां जान-माल की काफी क्षति भी हुई, लेकिन बुलंद हौसलों को तवज्जो देते हुए मुश्किलों को पराजित करते  परन्तु अपनी जान की परवाह किए बगैर इन्होंने कई लोगों की जान बचाई। इतने सबके बाद भी वह थमे नहीं वह फिर से गत वर्ष 2019 में माउण्ट एवरेस्ट की चोटी चढ़े और वहां से ‘स्वच्छ भारत मिशन’, ‘नमामि गंगे’ हेतु जन-जागरण किया एवं देशवासियों से जल संरक्षण की अपील की। वह प्रथम एवं एक मात्र ऐसे सिविल सर्वेन्ट हैं, जिन्होंने दो बार माउण्ट एवरेस्ट पर दोनों अलग-अलग मार्गों से चढ़ाई की है। इस विषय में उन्होंने ‘शिखर से पुकार’ नामक लघु डाॅक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति लोगो को जागरूक करने के अथक प्रयास किये। डीएम रविन्द्र कुमार ने अपनी पुस्तक के जरिये सभी आम लोगों को अपने अपूर्ण सपने को साकार करने के लिए संघर्ष करते रहना व मनोबल बनाये रखने की सीख देते हुए कामना की है कि ऐसे संघर्षरत लोग हमेशा उत्तम स्वास्थ्य, धन-सम्पत्ति, शांति और समृद्धि सभी में सफलदायी साबित हो। 

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