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नई दिल्ली । राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग (एनसीडीआरसी) ने बीमा क्षेत्र की अग्रणी कंपनी एलआईसी को एक पॉलिसीधारक की विधवा बोनस और ब्याज के साथ 1.5 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। एनसीडीआरसी ने बीमा कंपनी की इस दलील को खारिज कर दिया कि पॉलिसीधारक ने बीमा पॉलिसी खरीदते समय अपने स्वास्थ्य के बारे में गलत जानकारी दी थी। एनसीडीआरसी ने एलआईसी को पॉलिसीधारक नरेंद्र कुमार पांडेय की विधवा सुनीता देवी को दावे की राशि के साथ बोनस और 2007 से इस राशि पर ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया है। इस बारे में शिकायत 2007 में ही दर्ज की गई थी। आयोग ने अपने हालिया आदेश में कहा कि बीमा कंपनी ने पांडेय द्वारा पॉलिसी लेते समय बीमारी के बारे में छिपाने को लेकर कोई अपील नहीं की है। आयोग ने कहा कि मौजूदा मामले में बीमा कंपनी ने इस बारे में कोई दलील नहीं दी कि बीमित द्वारा दो बीमा पॉलिसियां लेते समय उसने अपनी बीमारी के बारे में जानकारी नहीं दी थी। आयोग की पीठासीन सदस्य दीपा शर्मा और सदस्य सी विश्वनाथ की पीठ ने यह आदेश दिया। सुनीता देवी के पति ने 25 नवंबर, 1997 को एक लाख रुपये और 5,000 रुपये की दो बीमा पॉलिसियां ली थीं। पैसे की दिक्कत की वजह से ये पॉलिसियां बंद हो गई थीं। 19 जून, 2002 को इन्हें फिर शुरू किया गया। सुनीता के पति का निधन 24 मई, 2005 को हुआ था। बाद में नॉमिनी के रूप में सुनीता ने दोनों पॉलिसियों के लिए दावा किया था। हालांकि एलआईसी ने एक लाख रुपये की पॉलिसी पर सिर्फ 34,300 रुपये और 50,000 रुपये की पॉलिसी पर सिर्फ 10,750 रुपये का दावा मंजूर किया था। कंपनी का कहना है कि बीमित ने पॉलिसी को दोबारा चालू करते समय अपनी बीमारी के बारे में जानकारी नहीं दी थी। सुनीता देवी ने कहा कि उनके पति का गुर्दा प्रत्यारोपण वर्ष 2000 में हुआ था। उस समय उनके पति ने इसके लिए दावा भी किया था। पॉलिसियों को फिर से शुरू करते समय बीमा कंपनी को पांडेय के गुर्दा प्रत्यारोपण की पूरी जानकारी थी।

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