एसपीएन न्यूज़ नेटवर्क
सहारनपुर। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता व पूर्व विधायक काजी इमरान
मसूद के बसपा में शामिल होने की चर्चाओं के चलते जिले में एक बार फिर गया
राम-आया राम की हलचल शुरू हो गई है। बसपा में इमरान मसूद की आमद के चलते
सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र के बसपा सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने भी सपा
हाईकमान के साथ पींगे बढ़ानी शुरू कर दी हैं। इसके चलते राजनीतिक हलकों
में निकट भविष्य में सांसद हाजी फजलुर्रहमान के समाजवादी पार्टी में
शामिल होने के कयास लगाए जाने लगे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं
बल्कि देश की राजनीति में अपना अच्छा रसूख रखने वाले गंगोह के काजी
परिवार का लगभग पांच दशकों से खासा दबदबा रहा है। 1996 में तत्कालीन
मुजफ्फराबाद सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उत्तर प्रदेश के
तत्कालीन उद्योग मंत्री जगदीश राणा को धूल चटाकर विधानसभा पहुंचने वाले
काजी इमरान मसूद के दादा काजी मसूद एक बार विधायक व चाचा काजी रशीद मसूद
पांच बार लोकसभा व दो बार राज्यसभा सांसद रहने के साथ ही उपराष्ट्रपति का
चुनाव भी लड़े थे। कांग्रेस में राष्ट्रीय सचिव जैसी महती जिम्मेदारी
संभाल रहे काजी इमरान मसूद ने गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सपा के
साथ गठबंधन न होने की वजह से सपा का दामन थाम लिया था परंतु सपा में
पूर्व विधायक इमरान मसूद को कोई खास तवज्जे नहीं मिली थी तथा जिला स्तर
पर भी निवर्तमान जिलाध्यक्ष डा. रागिब अंजुम को छोड़कर सपा के तमाम
प्रतिनिधि इमरान मसूद के साथ जुगलबंदी करने में लगे हुए थे। इस कारण
पूर्व विधायक इमरान मसूद नए राजनीतिक ठिकाने की तलाश में थे जिसे बसपा के
उत्तराखंड प्रदेशाध्यक्ष रहे नरेश गौतम ने बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती
से इमरान मसूद की मुलाकात कराकर उनकी राह आसान कर दी। सूत्रों का कहना है
कि यदि सबकुछ ठीकठाक रहा तो इमरान मसूद 15 अक्टूबर को बसपा के हाथी पर
सवार हो जाएंगे। माना जा रहा है कि बसपा में शामिल होने के बाद उनके
दामाद शायान मसूद को सहारनपुर नगर निगम के महापौर व स्वयं इमरान मसूद
बसपा के टिकट पर सहारनपुर लोकसभा सीट पर अपना किस्मत आजमाएंगे। बसपा में
इमरान मसूद का शामिल होना तय मानकर सहारनपुर लोकसभा सीट के मौजूदा बसपा
सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित रखने की
उधे़ड़बुन शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि जिस तरह बसपा के दलित कैडर
द्वारा सांसद हाजी फजलुर्रहमान पर उपेक्षा के आरोप लगाए हैं तथा हाल ही
में बसपा के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर पूर्व विधायक रविंद्र
मोल्हू ने भी नगर निगम के महापौर के चुनाव में तत्कालीन बसपा प्रत्याशी
के रूप में हाजी फजलुर्रहमान पर यह कहकर निशाना साधा है कि यदि हमारा
प्रत्याशी वहां मौजूद होता तो हम जीत का प्रमाण पत्र लेकर आते। इस तरह के
आरोपों को बसपा हाईकमान ने गम्भीरता से लिया है। इसके अलावा गत विधानसभा
चुनाव में बेहट के बसपा प्रत्याशी रईस मलिक द्वारा भी सांसद हाजी
फजलुर्रहमान पर सपा प्रत्याशी उमर अली खान का समर्थन करने का आरोप लगाते
हुए यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि वह हाजी फजलुर्रहमान के साथ कोई भी मंच
साझा नहीं करेंगे। इन परिस्थितियों के चलते हाजी फजलुर्रहमान का बसपा से
टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है। बसपा सांसद हाजी फजलुर्रहमान द्वारा
हाल ही में सपा के संस्थापक व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के
निधन पर पार्टी लाईन से हटकर उनके सैफई स्थित निवास पर पहुंचकर उनके बेटे
व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सांत्वना देना भी राजनीतिक हलकों में
चर्चा का केंद्र बना हुआ है क्योंकि बसपा सुप्रीमो मायावती ने केवल
ट्विटर पर मुलायम सिंह यादव के निधन पर शोक जताया था तथा बसपा के किसी भी
नेता ने मुलायम सिंह यादव के अंतिम संस्कार में सैफई जाना गंवारा नहीं
समझा। ऐसी परिस्थिति में बसपा सांसद हाजी फजलुर्रहमान के सैफई जाने को
लेकर भी बसपा से किनारा करने की रणनीति माना जा रहा है। इसके अलावा हाजी
फजलुर्रहमान भी इससे कई बार पार्टी लाईन से हटकर बयानबाजी कर चुके हैं।
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि इमरान मसूद के बसपा में शामिल होने
की स्थित धनकुबेर बसपा सांसद हाजी फजलुर्रहमान अपने किसी परिजन को
समाजवादी पार्टी के सिम्बल पर सपा के टिकट पर महापौर का चुनाव लड़ाने का
काम करेंगे ताकि महापौर के पिछले चुनाव में इमरान मसूद की वजह से मिली
हार का बदला लिया जा सके। जनपद की राजनीति में चल रही आया राम-गया राम की
स्थिति के मद्देनजर भाजपाई खेमे में खुशी की लहर है। माना जा रहा है कि
इमरान मसूद के बसपा में शामिल होने से मुस्लिम मतों का बंटवारा होने के
चलते भाजपा महापौर की सीट पर आसानी से पुनः कब्जा कर लेगी परंतु जिस तरह
इमरान मसूद के बसपा में आने पर जनपद में दलित मुस्लिम समीकरण मजबूत होगा,
उसके चलते जनपद की सातों विधानसभा सीटों व सहारनपुर लोकसभा सीट पर भाजपा
की राह आसान नहीं होगी। अब देखना है कि जिले में चल रही आया राम-गया राम
की राजनीति में किस-किसकी किस्मत का सितारा बुलंद हो पाएगा?

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