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नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने घर खरीदारों को वित्तीय लेनदार का दर्जा दिये जाने संबंधी दिवालिया एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में संशोधन की वैधता शुक्रवार को बरकरार रखी। न्यायमूर्ति रोहिंगटन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने संहिता के संशोधनों को बरकरार रखते हुए कहा कि इससे बिल्डरों के अधिकारों का हनन नहीं होता।

शीर्ष अदालत ने कम से कम 180 याचिकाओं को निपटारा करते हुए घर खरीदारों को वित्तीय लेनदारों (फाइनेंशियल क्रेडिटर्स) का दर्जा दिया। रियल एस्टेट कंपनियों ने सरकार द्वारा किए गए आईबीसी संशोधन को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया था।

पीठ ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर पर अंकुश लगाने के लिए तैयार रियल एस्टेट विनियमन कानून (रेरा) को आईबीसी में संशोधन के साथ पढ़ा जाना चाहिए। इस फैसले के साथ ही इन्सॉल्वेंसी से जुड़ी कार्यवाही में घर खरीदारों की सहमति की जरूरत होगी। गौरतलब है कि वर्ष 2018 में संसद ने आईबीसी कानून पारित किया था, जिसमें घर खरीदारों और निवेशकों को दिवालिया घोषित कंपनी का कर्जदाता माना गया था।

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